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सोनम बेवफाएं नहीं होती वो तो माता-पिता के आगे हार जाती हैं इस बात पर सुप्रीम कोर्ट ने लगा दी है मुहर

अक्सर समय-समय पर सोशल मीडिया में लड़कियों का मजाक बनाया जाता रहा है| सोनम गुप्ता बेवफा है| नोटों पर,डॉलरों,पर सिक्कों पर न जाने कहाँ-कहाँ पर लिख मारा, जमीन से लेकर उसका नाम आसमान तक लिख दिया| चुटकले बना डाले, कार्टून और व्यंग्य वीडियो भी बनाये गए लेकिन ये सिलसिला अभी तक थमा नहीं है| लोगों को ये जानने की फुर्सत नहीं होती कि लड़कियां भावुक होती हैं|

वो बेवफाई कतई नहीं करती लेकिन प्रेम के किस्से कहानियों के लिए प्रसिध्द रहा ये देश जहाँ राधा कृष्ण, हीर राँझा,शीरी फरियाद जैसी असंख्य कहानियां फिजाओं में जनश्रुतियों के रूप में गुंजायमान आज भी बनी हुई हैं| लेकिन तब से लेकर आज तक लोग प्रेम के दुश्मन उस दौर में भी थे और आज भी दौर बदला नहीं है| सुप्रीम कोर्ट ने भी इस बात की गहरी पीड़ा जताई है, कहा है कि देश में असफल प्रेम का कारण, भारत में माता-पिता के फैसले को स्वीकार करने के लिए लड़कियों को अपने रिश्तों का बलिदान करना एक आम घटना हो गयी है|

ये बात कोर्ट ने 22 साल पहले के केस का फैसला देते हुए कहा था| सर्वोच्च न्यालय ने एक प्रेमी की उम्रकैद की सजा को रद्द कर दिया| हुआ यह था कि 1995 एक लड़के ने अपनी प्रेमिका से गुपचुप शादी की और और फिर तुरंत ही दोनों ने आत्महत्या की कोशिश कर डाली| इस चक्कर में 23 साल की लड़की तो मर गयी लेकिन लड़का किसी तरह बच गया| इसके बाद लड़के के खिलाफ पुलिस ने लड़की की हत्या का मामला दर्ज कर लिया| इस केस में निचली अदालत ने लड़के को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुना डाली |

इस फैसले की राजस्थान हाईकोर्ट ने भी मोहर लगा दी तब लड़के का परिवार सुप्रीम कोर्ट गया| सुप्रीम कोर्ट ने कहा परिकल्पना के आधार पर अपराधिक मामलों के निर्णय नहीं किये जा सकते और पर्याप्त संदेह के बावजूद अभियोजन पक्ष उसका दोष साबित करने में सक्षम नहीं रहा है| इसलिए लड़के को बरी कर दिया गया| जस्टिस एके सीकरी और अशोक भूषण की पीठ ने कहा कि अनिच्छा से ही सही, लेकिन लड़की ने जिस तरह माता-पिता के फैसले को स्वीकार करने के लिए अपने प्यार का बलिदान किया|

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