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भ्रष्टाचारियों को इज्जत मिलेगी तो फिर कैसे कम होगा भ्रष्टाचार

भारत भी इतने विरोधाभासों और पाखण्ड से भर गया है कि यहाँ कोई भी सामाजिक, राजनैतिक सुधार करने कि सोचना ही मानो दूर कि कौड़ी लगता है| लोकतंत्र में लोग इस कदर मनमानी करने को आजाद हैं कि गलत करते रहने कि आदत ही पाल बैठे हैं| लगता है मानो पूरी व्यवस्था राम भरोसे चल रही है| भ्रष्टाचारियों ने पूरे लोकतंत्र को बंधक बना लिया है| भ्रष्टाचार कहीं कम तो कहीं ज्यादा है| लेकिन है हर क्षेत्र में| कड़े कानून आये, तमाम सरकारें आयीं-गयीं लेकिन भ्रष्टाचार जो जन-जीवन का हिस्सा बना हुआ है, उस पर कोई आंच नहीं आई है|

भ्रष्टों के हौसले अभी भी बुलंद हैं| सरकारों की कवायद रहती है कि भ्रष्टाचारियों की जनता शिकायत करे, सबूत दे तो उन्हें सलाखों के पीछे पहुंचा दिया जायेगा| वास्तविकता में ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है| ज्यादा से ज्यादा सस्पेंड कर दिया जाता है जो थोड़े टाइम के बाद फिर से वापस लौटता है| सुरक्षित तरीके से भ्रष्टाचार करने को| सभी सरकारी कर्मचारी अपने किसी कर्मचारी को भ्रष्टाचार के मामले में फंसता देखते हैं, तो मिलकर उसे बचाने की कवायद में जुट जाते हैं| और बहुतेरे मामलों में वे बचा भी ले जाते हैं| शिकायतकर्ता को ही समझौता करने को मजबूर कर देते हैं|

यदि सूचना अधिकार का कानून नहीं बना होता तो व्यापक घोटालों के कांड कभी भी जनता के सामने नहीं आ पाते| लेकिन भ्रष्टाचारी इस कदर जमीदारों की तरह बाहुबली माफिया बन जाते हैं कि सूचना अधिकार मांगने वाले तमाम कार्यकर्ताओं को मरवा चुके हैं| आज भी ऐसे लोग जान जोखिम में डालकर घोटालों और तमाम छोटी-छोटी जानकारियों को जनता तक पहुंचाते हैं| जिन्हें गोपनीयता कि आड़ में छिपा कर रखा जाता है| जाने-माने भारत के राजनीतिज्ञ गुरु चाणक्य ने कहा भी था कि जैसे समुन्द्र में विचरण करती मछलियाँ कब समुन्द्र का पानी पी जाती हैं|

वो खुद उन मछलियों को भी नहीं मालूम पड़ता ठीक वैसे ही राजनीतिज्ञ लोग कब शासन में रहते-रहते सरकारी कोष को निगल जाते हैं| या कहें भ्रष्टाचार कर जाते हैं ये खुद उनको भी मालूम नहीं पड़ता तो फिर सी.बी.आई. क्या पता लगा लेगी जो कि उनके लिए एक तंत्र से ज्यादा कुछ भी मायने नहीं रखती| तो फिर इन हालातों में कैसे भ्रष्टाचार कम हो सकेगा| सबसे बड़ी समस्या है आम लोगों की, जो भ्रष्ट लोगों को सम्मान देते हैं और उन्हें अपरोक्ष रूप से जाने-अनजाने में बढ़ावा देते हैं| उनसे सम्बन्ध रखना गौरव कि बात समझते हैं| उनके यहाँ शादी, पार्टी, आदि में शिरकत करने को व्याकुल रहते हैं| उन्हें सम्मान देते हैं, और अपने यहाँ हर कार्यक्रम में बुलाते हैं और रिश्तेदारों के सामने अपने और उनके सम्बन्धों का गुणगान करते हैं| इन भ्रष्ट लोगो को गिफ्ट भी देते रहते हैं|

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