Viral

लिव इन रिलेशनशिप की शुरुआत कबीरदास ने की थी

काशी में जन्मे कबीरदास जी आज भी हमें अपने दोहों के माध्यम से याद आते रहते हैं| वे एक समाज सुधारक, कवि से भी कहीं अधिक एक आध्यात्मिक संत थे| वे उस युग में पैदा हुए थे, जहाँ देश में एक अलग किस्म की अराजकता व्याप्त थी| मुस्लिम राजाओं का शासन था| हिन्दू और मुसलमान अपने-अपने धर्मों को लेकर बेहद कट्टरपंथी रुख रखते थे| और एक दुसरे से एक अनकही अनचाही नफ़रत रखते थे! अपने-अपने धर्मों की परम्पराएं और कर्मकाण्डों पर दोनों को गहरा अभिमान था| एक दूसरे की निंदा करने में कोई किसी से पीछे नहीं था|

कमोवश आज भी ऐसा माहौल है| देश में ही नहीं दुनिया में भी लेकिन कबीर के दोहे सुनने का वक़्त किसी के पास नहीं है| एक दूसरे को ट्रोल करने के लिए ट्विट्टर की सुविधा है तो भ्रम फैलाने के लिए फेसबुक, व्हाट्सएप हैं जिनके जरिये लोग एक दूसरे के धर्मों की खामियों की धज्जियाँ उड़ा कर अपने अहमों को सहलाते नजर आते हैं| कबीर ऐसी ही बेशुमार नफ़रत और गरीब बेबसियों के बीच कबीर ने दोनों धर्मों के मर्म को समझाने और कर्मकाण्डों को गैर जरूरी बताने में ही अपना पूरा जीवन खपा दिया था|

लेकिन उन की बात तब भी धर्मान्धों ने नहीं सुनी और आज भी सब कुछ वैसा ही माहौल है जैसा कि कबीर के ज़माने में था| वे इस कदर धर्मान्धता के विरोधी थे कि जैसे ही वे निरर्थक बातों की धज्जियाँ उड़ाते थे, तो हिन्दू मुस्लिम, मौलवी, पंडित सभी उनके खिलाफ लड़ने मरने को तैयार हो जाते थे लेकिन कबीर के तर्कों के आगे वे  लाचार रहकर पीठ पीछे षड़यंत्र करते रहते| कबीर की सूझ-बूझ और आध्यात्मिक शक्ति उन्हें उनके इरादों में कामयाब नहीं होने देती| कबीर को गरीब वर्ग का व्यापक समर्थन मिलता रहता था| जो उनके लिए सुरक्षा कवच होता था!जनता कबीर की बातों से पूरी तरह से सहमत होती थी लेकिन पंडित और मौलवियों से परेशान रहती थी|

Pages: 1 2

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Most Popular

To Top